ऑप्शन ट्रेडिंग · आसान हिंदी में
ऑप्शन ब्रेकईवन कैसे निकालें: ऑप्शन खरीदने से पहले रिस्क कैसे चेक करें
9AM Traders Academy, नई दिल्ली · 29 अक्टूबर 2026
ज़्यादातर नए ट्रेडर्स ऑप्शन खरीदते समय सिर्फ़ प्रीमियम देखते हैं: “सिर्फ़ ₹120 का है।” लेकिन यह नहीं देखते कि मार्केट को कितना चलना होगा, चार्ज कितने लगेंगे, और अगर मार्केट हिला ही नहीं तो क्या होगा। यह गाइड इन्हीं सवालों के जवाब आसान भाषा में देती है।
91%इंडिविजुअल ट्रेडर्स को FY2024-25 में इक्विटी F&O में नेट लॉस हुआ, SEBI की स्टडी के मुताबिक। यानी 10 में से 9।इस लेख में
- ऑप्शन के 4 ज़रूरी शब्द
- ब्रेकईवन कैसे निकालें
- ऑप्शन पर कितने चार्ज लगते हैं
- प्रॉफिट का चांस कितना है
- टाइम डिके: इंतज़ार की कीमत
- कितने लॉट लें
- हेज्ड ट्रेड: लॉस पहले से तय
- ट्रेड से पहले 5 सवाल
ऑप्शन के 4 ज़रूरी शब्द
आपके ट्रेडिंग ऐप में ऑप्शन कुछ ऐसा दिखता है। इसके हर हिस्से का एक मतलब है:
NIFTY 4 NOV 25100 CE₹120.00 स्पॉट प्राइस (Spot price)इंडेक्स अभी कहाँ है। ऐप में सबसे ऊपर दिखने वाला बड़ा नंबर, जैसे Nifty 25,000। स्ट्राइक प्राइस (Strike price)ऑप्शन के नाम वाला लेवल, यहाँ 25100। कॉल तभी पैसा देता है जब Nifty इसके ऊपर जाए। CE और PECE (कॉल) यानी आपको लगता है मार्केट ऊपर जाएगा। PE (पुट) यानी नीचे जाएगा। प्रीमियम (Premium)एक यूनिट का दाम, यहाँ ₹120। आप इसे लॉट साइज़ से गुणा करके देते हैं।
लॉट साइज़ वह तय संख्या है जिसमें ऑप्शन बिकते हैं। जनवरी 2026 से एक Nifty 50 लॉट 65 यूनिट का है, Bank Nifty 30, Fin Nifty 60, Midcap Nifty 120 और Nifty Next 50 का 25। इसलिए ₹120 वाला एक Nifty लॉट असल में ₹120 × 65 = ₹7,800 का पड़ता है, ₹120 का नहीं।
ब्रेकईवन कैसे निकालें
ब्रेकईवन वह लेवल है जहाँ आपका ट्रेड न फ़ायदे में है, न नुकसान में। उससे पहले आप लॉस में हैं, चाहे मार्केट आपकी दिशा में ही क्यों न चल रहा हो।
कॉल (CE) ब्रेकईवन = स्ट्राइक + प्रीमियम + हर यूनिट के चार्ज
पुट (PE) ब्रेकईवन = स्ट्राइक − प्रीमियम − हर यूनिट के चार्ज
उदाहरण: NIFTY 25100 CE, ₹120, 1 लॉट, Nifty अभी 25,000
25,100 + 120 = 25,220
+ चार्ज (लगभग ₹66 ÷ 65 यूनिट ≈ 1 पॉइंट) = 25,221
यानी Nifty को एक्सपायरी तक 25,000 से 221 पॉइंट (+0.9%) ऊपर जाना होगा, सिर्फ़ ₹1 कमाने के लिए। अगर एक्सपायरी के दिन Nifty 25,100 या उससे नीचे रहा, तो पूरे ₹7,800 और चार्ज डूब जाएंगे।
याद रखें: ऑप्शन खरीदने के लिए सिर्फ़ सही दिशा काफ़ी नहीं है। मार्केट को ब्रेकईवन तक और समय रहते पहुँचना होगा।
ऑप्शन पर कितने चार्ज लगते हैं
ब्रोकरेज के अलावा हर ट्रेड पर टैक्स और फीस भी लगती हैं। NSE ऑप्शन के लिए ये दरें हैं (Zerodha की चार्ज लिस्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026):
| चार्ज | कितना | कब |
|---|---|---|
| ब्रोकरेज | ₹20 प्रति ऑर्डर (ज़्यादातर डिस्काउंट ब्रोकर) | खरीद और बिक्री दोनों |
| STT | प्रीमियम का 0.15% | सिर्फ़ बिक्री पर |
| एक्सचेंज चार्ज | प्रीमियम का 0.03553% | दोनों |
| SEBI फीस | ₹10 प्रति करोड़ | दोनों |
| स्टांप ड्यूटी | 0.003% | सिर्फ़ खरीद पर |
| GST | ब्रोकरेज और फीस पर 18% | दोनों |
ऊपर वाले उदाहरण में खरीदने और बेचने के कुल चार्ज लगभग ₹66 बनते हैं। छोटा लगता है, लेकिन रोज़ 4 से 5 ट्रेड करने वाले के लिए महीने में यह हज़ारों में पहुँच जाता है।
प्रॉफिट का चांस कितना है
ऑप्शन का दाम खुद बताता है कि मार्केट कितनी हलचल की उम्मीद कर रहा है। इसे इम्प्लाइड वोलैटिलिटी कहते हैं। उसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि एक्सपायरी तक इंडेक्स आम तौर पर कितना चलता है।
उसी उदाहरण में, 5 दिन की एक्सपायरी
₹120 के दाम के हिसाब से Nifty आम तौर पर एक्सपायरी तक दोनों तरफ़ लगभग 390 पॉइंट चलता है। आपको अपनी दिशा में 221 पॉइंट चाहिए। इसका मतलब, ब्रेकईवन के ऊपर बंद होने का चांस लगभग 10 में से 3 है।
यानी हर 10 ऐसे ट्रेड में से लगभग 7 बार पैसा डूबेगा, और बाकी 3 बार की कमाई को उन 7 का घाटा पूरा करना होगा। यह अंदाज़ा मॉडल से है, गारंटी नहीं, लेकिन तस्वीर साफ़ कर देता है।
टाइम डिके: इंतज़ार की कीमत
ऑप्शन हर दिन थोड़ी कीमत खोता है, भले ही मार्केट बिल्कुल न हिले। एक्सपायरी के पास यह गिरावट और तेज़ हो जाती है। इसे टाइम डिके कहते हैं।
उदाहरण: अगर Nifty 25,000 पर ही रुका रहे
| कब | आपके ऑप्शन की कीमत (लगभग) |
|---|---|
| आज | ₹7,800 |
| 2 दिन बाद | ₹5,349 |
| एक्सपायरी के दिन | ₹0 |
सिर्फ़ 2 दिन इंतज़ार में लगभग ₹2,451 का नुकसान, बिना मार्केट के आपके खिलाफ़ गए।
इसी वजह से सस्ते वीकली ऑप्शन अक्सर ज़ीरो हो जाते हैं। सस्ता दिखना और फ़ायदेमंद होना, दो अलग बातें हैं।
कितने लॉट लें
अनुभवी ट्रेडर्स एक ट्रेड पर अपने अकाउंट का 1 से 2% से ज़्यादा रिस्क शायद ही लेते हैं। हिसाब सीधा है:
ज़्यादा से ज़्यादा लॉट = (अकाउंट × रिस्क %) ÷ एक लॉट का ज़्यादा से ज़्यादा लॉस
उदाहरण: अकाउंट ₹1,00,000, रिस्क रूल 2%
आप एक ट्रेड पर ₹2,000 तक गंवा सकते हैं। लेकिन ऊपर वाले ऑप्शन के एक लॉट में ही ₹7,827 का रिस्क है, जो अकाउंट का 7.8% है। यानी यह ट्रेड आपके रूल के हिसाब से एक लॉट के लायक भी नहीं है। सस्ता ऑप्शन चुनें, हेज्ड ट्रेड देखें, या यह ट्रेड छोड़ दें।
हेज्ड ट्रेड: लॉस पहले से तय
हेज यानी एक दूसरी पोज़ीशन जो आपकी मुख्य पोज़ीशन गलत जाने पर नुकसान सीमित कर दे। हेज्ड ट्रेड में आपको पहले से पता होता है कि ज़्यादा से ज़्यादा कितना लॉस हो सकता है।
1. स्प्रेड: एक खरीदो, एक आगे बेचो
जैसे 25000 CE खरीदें और 25150 CE बेचें। बेचा हुआ ऑप्शन आपका खर्च कम करता है, लेकिन प्रॉफिट की एक सीमा भी लगा देता है। उदाहरण में खर्च घटकर लगभग ₹4,387 रह जाता है और प्रॉफिट का चांस लगभग 10 में 5 हो जाता है।
2. पैसा पहले मिलने वाला स्प्रेड
जैसे 24900 PE बेचें और सुरक्षा के लिए 24800 PE खरीदें। अगर मार्केट आपके खिलाफ़ न जाए, तो मिला हुआ पैसा आपका। उदाहरण में चांस लगभग 10 में 6 से 7 है।
लेकिन ध्यान दें: चांस जितना ज़्यादा, रिस्क के बदले रिवॉर्ड उतना छोटा। उदाहरण के एक बहुत दूर वाले स्प्रेड में चांस 73% है, लेकिन ₹1 कमाने के लिए ₹3.3 का रिस्क। एक बुरा दिन कई छोटी जीत मिटा सकता है। हेज्ड ट्रेड सुरक्षित ज़्यादा हैं, रिस्क-फ़्री नहीं। ऑप्शन बेचने के लिए अकाउंट में मार्जिन भी चाहिए।
ट्रेड से पहले 5 सवाल
- मेरा ब्रेकईवन क्या है, और मार्केट को वहाँ तक कितना चलना होगा?
- क्या यह चाल मार्केट की आम चाल के अंदर है या उससे बड़ी?
- अगर मार्केट 2 दिन न हिले, तो मेरा कितना पैसा घटेगा?
- क्या यह ट्रेड मेरे अकाउंट के 1 से 2% रिस्क रूल के अंदर है?
- क्या कोई हेज्ड तरीका है जिसमें मेरा लॉस पहले से तय हो?
इन पाँचों सवालों के जवाब हमारा फ्री कैलकुलेटर 30 सेकंड में देता है। बस अपने ऐप से ऑप्शन का नाम डालें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऑप्शन में ब्रेकईवन कैसे निकालते हैं?
कॉल ऑप्शन का ब्रेकईवन = स्ट्राइक प्राइस + प्रीमियम + हर यूनिट के चार्ज। पुट ऑप्शन में स्ट्राइक प्राइस में से प्रीमियम और चार्ज घटा दें।ज़्यादातर ऑप्शन खरीदने वाले पैसा क्यों गंवाते हैं?
ऑप्शन खरीदने वाले को प्रीमियम, चार्ज और टाइम डिके तीनों को पार करने के लिए मार्केट का काफ़ी और जल्दी चलना ज़रूरी है। SEBI की FY2024-25 की स्टडी में लगभग 91% इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को नेट लॉस हुआ। ज़्यादा जानकारी के लिए Business Standard की रिपोर्ट पढ़ें।सस्ता ऑप्शन खरीदना बेहतर है या महंगा?
सस्ते (दूर वाले) ऑप्शन में कम पैसा लगता है, लेकिन बड़े और जल्दी मूव की ज़रूरत होती है, इसलिए ज़्यादातर ज़ीरो पर एक्सपायर होते हैं। महंगे (पास वाले) ऑप्शन में चांस ज़्यादा है, लेकिन ज़्यादा पैसा दांव पर लगता है।एक ट्रेड में कितने लॉट लेने चाहिए?
तय करें कि एक ट्रेड पर अकाउंट का कितना पैसा गंवा सकते हैं, आम तौर पर 1 से 2%, और उसे एक लॉट के ज़्यादा से ज़्यादा लॉस से भाग दें।
अपना ट्रेड खुद चेक करें
हमारा फ्री ऑप्शन कैलकुलेटर ब्रेकईवन, प्रॉफिट का चांस, सही लॉट साइज़, टाइम डिके और हेज्ड विकल्प, सब आसान भाषा में दिखाता है। लाइव क्लास में सीखना हो तो 9AM Traders Academy के कोर्स देखें।
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मार्केट बंद होने के बाद 3:31 Flip पर देखें कि आज बाकी ट्रेडर्स का दिन कैसा रहा।
यह लेख सिर्फ़ शिक्षा के लिए है, किसी ट्रेड की सलाह नहीं। उदाहरण के नंबर समझाने के लिए हैं; असली दाम और चार्ज आपके ब्रोकर ऐप में देखें। ऑप्शन ट्रेडिंग में आपका पूरा पैसा डूब सकता है।